Srila Gurudeva
Harinam Chintamani
1. श्रीनाम – महिमा
2. नामग्रहण-विचार
3. नामाभास-विचार
4. साधु निन्दा
5. पाँचवा परिच्छेद
6. गुरु-अवज्ञा
7. श्रुति-शास्त्र की निन्दा
8. हरिनाम में अर्थवाद
9. हरिनाम के बलबूते पर पाप करना
10. श्रद्धाहीन व्यक्ति को हरिनाम का उपदेश
11. अन्य शुभकर्मों को हरिनाम के बराबर समझना
12. प्रमाद नामक नामापराध
13. अहम्–मम् भाव नामक अपराध
14. सेवापराध
15. भजन-प्रणाली