
Today's Updesh
भगवान् अप्राकृत हैं और उनके अभिन्न प्रकाश विग्रह श्रीगुरु भी। इसलिए एक कनिष्ठ भक्त अपने प्रयास के द्वारा गुरुदेव के दिव्य अनुभूतियों को समझ नहीं सकता है।
श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज
वामनावतार
दशावतारों में पांचवें अवतार हैं श्री वामनावतार। लीलावतार असंख्य हैं। उनमें से मुख्य 25 लीलावतारों में से श्री वामनदेव जी का 18वां अवतार है। पूर्व वर्णित मत्स्यावतार वर्णन के प्रसंग में सभी लीलावतारों का उल्लेख हुआ है। द्वारका में वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न व अनिरुद्ध श्री कृष्ण के आदि चतुर्व्यूह हैं। ये श्री कृष्ण के प्राभव विलास हैं। श्री कृष्ण की ऐश्वर्य मूर्ति नारायण, जो कि वैकुण्ठ में स्थित है, उनका भी चतुर्व्यूह हैं, इसे द्वितीय चतुर्व्यूह कहा जाता है। द्वितीय चतुर्व्यूह में प्रत्येक के तीन-तीन रूप हैं। उनमें से प्रद्युम्न की त्रिविक्रम, वामन और श्रीधर तीन मूर्तियां हैिं। द्वितीय चतुर्व्यूह के तीन-तीन करके 12 रूप हैं, जो कि 12 मास के 12 अधिदेवता हैं।
आज की तिथि - September 25, 2026
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Gaudiya kanthahara
श्रीमद्भागवतम
११-५-४१
देवर्षिभूताप्तनृणां पितृणां न किंकरो नायमृणी च राजन् ।
सर्वात्मना यः शरणं शरण्यं गतो मुकुन्दं परिहृत्य कर्तम् ।।
हे राजन! जिसने सारे भौतिक कार्यों को त्याग कर मुकुन्द के चरणकमलों में पूरी तरह शरण ले रखी है, जो सबों को शरण देता है, वह देवताओं, ऋषियों, सामान्य जीवों, सम्बन्धियों, मित्रों, मनुष्यों या मृत पितरों का ऋणी नहीं रहता। चूँकि इस सभी श्रेणियों के जीव भगवान् के भिन्नांश हैं, अतः जिसने भगवान् की सेवा में अपने को अर्पित कर दिया है, उसे ऐसे व्यक्तियों की अलग से सेवा करने की आवश्यकता नहीं रह जाती।
24 सितम्बर | गुरुवार |
श्री श्रील सच्चिदानन्द भक्ति विनोद ठाकुर जी का आविर्भाव।
25 सितम्बर | शुक्रवार |
श्रीअनन्त चतुर्दशी। श्रीहरिदास ठाकुर जी का तिरोभाव।
26 सितम्बर | शनिवार |
श्रीविश्वरूप महोत्सव। पूर्णिमा।
6 अक्तूबर | मंगलवार |
इन्दिरा एकादशी उपवास।
7 अक्तूबर | बुधवार |
पारण (राजस्थान में) प्रातः 10.27 से पहले। चण्डीगढ़: 10.12