
Today's Updesh
आचिनोति यः शास्त्रार्थमाचारे स्थापयत्यपि ।
स्वयमाचरते यस्मादाचार्य स्तेन कीर्तितः ।।
(वायु पुराण)
जो शास्त्र के अर्थ का चयन करके दूसरों को शास्त्र के अनुकूल आचरण की शिक्षा देते हैं तथा स्वयं शास्त्र के अनुसार चलते हैं उनको आचार्य कहा जाता है। आचरण रहित पेशेदार वक्ताओं के द्वारा कभी भी धर्म प्रचार नहीं होता। Dont follow me but follow my lecture मेरा आचरण मत देखो, जो मैं कहता हूँ उसे सुनो-इस नीति से धर्म प्रचार नहीं होता। हरिकथा किसकी जिह्वा से कीर्तित होती है, इस सम्बन्ध में बताते हुए श्रील प्रभुपाद जी ने कहा- जो 24 घण्टे में से 24 घण्टे ही हरि सेवा में नियोजित रहते हैं, जो प्रत्येक कदम पर हरि सेवा करते हैं, उनकी जिह्वा में हरि से अभिन्न हरिकथा प्रकट होती है।
श्री श्रीमद् भक्ति दयित माधव गोस्वामी महाराज जी
श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज का संक्षिप्त परिचय
‘ऊदाहरण उपदेश से श्रेष्ठ है’ – यही आपकी प्रचार-शैली थी। जो कोई भी आपके श्रेष्ठ व्यक्तित्व के संपर्क में आया उसने आपकी जीवों के प्रति करुणा, पूर्ण वैराग्य, पूर्ण सहिष्णुता, गहन आध्यात्मिक आनंद, श्री गुरु में अनन्य विश्वास और श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रति पूर्ण भक्ति एवं समर्पण के भाव को स्पष्ट रूप से देखा। आप शास्त्रों के सिद्धांतों से बिंदुमात्र भी विचलित न होने के लिए जाने जाते हैं। आपके सभी के प्रति अनुरागशील स्वभाव और गुरु-वैष्णवों की सेवा के प्रति समर्पण जैसे गुणों के लिए आप कई गौड़ीय संस्थाओं के आचार्यों के लिए आदर्श हैं।
आज की तिथि - March 17, 2026
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मार्च 29, 2026
श्रीकामदा एकादशी का व्रत।
मार्च 30, 2026
द्वादशी , प्रातः 7:38 से पहले पारण।