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भारतीय शास्त्र विधानानुसार भजन के दो मार्ग हैं—प्रवृत्ति मार्ग (गृहस्थ जीवन) और निवृत्ति मार्ग (गृह-त्यागी जीवन)। सामान्यतः लोग प्रवृत्ति मार्ग के अधिकारी होते हैं। विवाहित जीवन के बाहर (अवैध) स्त्री-संग वर्जित है। उन्हें यदि गृहस्थ जीवन में प्रवेश करना है, तो शास्त्र-विधि के अनुसार विवाह करना होगा—केवल सन्तान प्राप्ति के उद्देश्य से।
श्रील भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज
श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज का संक्षिप्त परिचय
‘ऊदाहरण उपदेश से श्रेष्ठ है’ – यही आपकी प्रचार-शैली थी। जो कोई भी आपके श्रेष्ठ व्यक्तित्व के संपर्क में आया उसने आपकी जीवों के प्रति करुणा, पूर्ण वैराग्य, पूर्ण सहिष्णुता, गहन आध्यात्मिक आनंद, श्री गुरु में अनन्य विश्वास और श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रति पूर्ण भक्ति एवं समर्पण के भाव को स्पष्ट रूप से देखा। आप शास्त्रों के सिद्धांतों से बिंदुमात्र भी विचलित न होने के लिए जाने जाते हैं। आपके सभी के प्रति अनुरागशील स्वभाव और गुरु-वैष्णवों की सेवा के प्रति समर्पण जैसे गुणों के लिए आप कई गौड़ीय संस्थाओं के आचार्यों के लिए आदर्श हैं।
आज की तिथि - August 30, 2025
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Gaudiya kanthahara
"इस अपार दुःख सागर को पार करने का एकमात्र उपाय सम्पूर्ण रूप से श्रीगुरु के चरण-कमलों में शरणागत होना है।"
भक्ति-रस का आस्वादन करने के लिये दो वस्तुओं का होना अनिवार्य है- एक सिद्ध वक्ता एवं दूसरा निष्कपट जिज्ञासु श्रोता। हमारी इस रस को अनुभव करने की असमर्थता का एकमात्र कारण इन दोनों में किसी एक वस्तु का अभाव है। इस प्रकार की वास्तविक, अप्राकृत अनुभूति मात्र कृत्रिम अनुकरण के द्वारा कदापि प्राप्त नहीं हो सकती।
श्रीमद्भक्तिकुमुद सन्त गोस्वामी महाराज


अगस्त 30, 2025
सप्तमी, श्रीललिता-सप्तमी
अगस्त 31, 2025
अष्टमी, श्रीराधाष्टमी। मध्याह्न में श्रीमति राधारानी का प्राकट्य। दोपहर 12.00 बजे तक उपवास ।
सितम्बर 04, 2025
द्वादशी, विजया महाद्वादशी का व्रत। श्रीहरि-पार्श्व-परिवर्तन। श्रीवामन द्वादशी। भगवान वामनदेव का प्राकट्य। श्रीजीव गोस्वामी प्रभु का आविर्भाव।