Srila Gurudeva
जगद्गुरु श्री गौर किशोर दास बाबा जी महाराज
1. प्रकृत गुरु और शिष्य
2. बहिरंग और अन्तरंग परिचय
3. वंचक वैष्णव
4. स्वानन्दसुखद कुंज में
5. माया का ब्रह्माण्ड
6. श्रीधाम मायापुर में
7. असली और नकली भजनानन्दी
8. श्रीधाम – वास और छलना
9. कपटता और भजन
10. विषयी का अन्न
11. श्रीधाम मायापुर में प्रीति
12. लोक – दिखावे का भाव
13. साधु के मर्मभेदी वाक्य
14. गृहवत धर्म और आत्म – मंगल
15. श्रीकृष्ण प्रीति के लिए भोगों का त्याग और फल्गु त्याग
16. “वही तो परम सुख”
17. बहुरूपिणी माया