नित्यलीला प्रविष्ट ॐ विष्णुपाद परिव्राजकाचार्य त्रिदण्डिस्वामी १०८ श्रीश्रीमद्भक्तिप्रसून बोधायन गोस्वामी महाराज
प्रणाम
नमो ॐ विष्णुपादाय गौरप्रेष्ठाय भूतले।
श्रीमते भक्तिप्रसून बोधायन गोस्वामीति नामिने।।

श्रील महाराज ने जगद्गुरु श्रीलप्रभुपाद भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी ठाकुर के विश्वव्यापी श्रीचैतन्यवाणी प्रचार के समय श्रीमुख से वीर्यवती हरिकथा एवं अतिमर्त्य महापुरुषोचित चरित्र, निष्कपट, निष्किंचन, शुद्धभक्ति अनुशीलन अनुरागी आदर्श का वैशिष्ट देखकर उनके प्रति आकर्षित होकर गार्हस्थ्य जीवन त्याग कर उनके श्रीचरणाश्रय कर श्रीहरिनाम दीक्षा ग्रहण की। काय-मनो-वाक्य से श्रीलप्रभुपाद की इच्छापूर्ति के लिए श्रीचैतन्य मठ की सेवा में आत्म समर्पण किया।

गुरु-वैष्णव-भगवान् और श्रीचैतन्य मठ की सेवा में अस्वाभाविक पवित्र शुद्धान्तःकरण एवं श्रीचैतन्यवाणी प्रचार में इनको अत्यन्त उत्साही देखकर श्रीलप्रभुपाद ने अत्यन्त प्रसन्न होकर कृपा करके विपुल प्रचार के लिए शीघ्र ही इन्हें त्रिदण्ड संन्यास प्रदान किया। जीवन में श्रीलप्रभुपाद का मनोभीष्ट पूर्ण करके श्रीमद्भक्तिप्रसून बोधायन गोस्वामी महाराज ने २८ आषाढ़, १३ जुलाई, बुधवार दिन में १० बजे ८९ वर्ष की आयु में नित्य वृन्दावनिय मध्याह्कलीला में प्रवेश किया।