ग्यारवा परिच्छेद
अन्य शुभकर्मों को हरिनाम के बराबर समझना
धर्मव्रतत्यागहुतादिसर्वशुभक्रियासाम्यमपि प्रमादः
जय जय गौरचन्द्र नाम अवतार।
जय जय हरिनाम सर्वतत्त्वसार ।।
हरिदास बले प्रभु कर अवधान।
अन्य शुभकर्म नहे नामेर समान ।।
नाम – प्रचार के उद्देश्य से अवतरित श्रीहरिनाम के अवतार स्वरूप श्रीगौरचन्द्र जी की जय हो। समस्त तत्त्वों के सार श्रीहरिनाम की जय हो। श्रील हरिदास ठाकुर जी बोले- हे प्रभु! दूसरे शुभ कर्म कभी भी हरिनाम की साधना के समान नहीं हो सकते हैं।
श्रीहरिनाम चिन्तामणि
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