इस विषय में महाप्रभु की आज्ञा

श्रद्धावान् जने कर नाम उपदेश।
नाम – महिमाय पूर्ण कर सर्वदेश ।।

उच्चसंकीर्त्तने कर श्रद्धार प्रचार
श्रद्धा लभि’ जीव करे सद्‌गुरू – विचार ।।

सद्गुरू – निकटे करे श्रीनाम – ग्रहण।
अनायासे पाय तबे कृष्ण – प्रेमधन ।।

चोर, वेश्या, शठ आदि पापासक्तजने ।
छाड़ाइया पापमति दिवे श्रद्धाधने ।।

सुश्रद्ध हइले दिवे नाम उपदेश।
एइ रूपे नाम दिया तार सर्वदेश ।।

श्रद्धा प्राप्त करके ही जीव सद्‌गुरु के सम्बन्ध में विचार करेगा। श्रद्धावान जीव सद्‌गुरु से श्रीहरिनाम ग्रहण करके अनायास ही श्रीकृष्ण – प्रेमधन प्राप्त कर लेगा। गुरु को चाहिए कि वह चोर, वेश्या तथा कपटी आदि पापों में लिप्त व्यक्तियों की पापमय बुद्धि को समाप्त करके उनके हृदय में श्रीकृष्ण नाम के प्रति श्रद्धा उत्पन्न करें। इस प्रकार के व्यक्तियों की जब हरिनाम में दृढ़ – श्रद्धा हो जाये तो वे उन्हें हरिनाम प्रदान करें। इस प्रकार हरिनाम का उपदेश देकर सारे विश्व का उद्धार करें।

श्री हरिनाम चिन्तामणि