श्रीकृष्ण नाम की सर्वोत्तमता

सहस्त्र (विष्णु) नामेर तुल्य हय (एक) राम नाम ।
तिन राम – नामतुल्य एक कृष्णनाम ।।

एक हज़ार विष्णु – नाम के बराबर एक राम नाम होता है, जबकि तीन राम नाम के बराबर एक कृष्ण नाम होता है।

नाम में अर्थवाद करने से अवश्य ही नरक-गति होती है

श्रुतिगण नामेर माहात्म्य सदा गाय।
नामेर चित्- तत्त्व बलि’ जगते जानाय ।।

श्रुति – स्मृति – प्रदर्शित नामेर ये फल।
ताहे अर्थवाद करे पाषण्डप्रबल ।।

हरिनामे अर्थवाद ये अधम करे।
से पापिष्ठ नरकेते पचि’ पचि’ मरे ।।

ये बले, – “नामेर फलश्रुति सत्य नय।
नामे रुचि दिते मात्र तत फल कय ।।

शास्त्रेर तात्पर्य, आर जीवहिताहित।
से अधम नाहि जाने, बुझे विपरीत ।।

श्रुति – शास्त्र हमेशा ही श्रीहरिनाम की महिमा गान करते रहते हैं तथा जगतवासियों को बताते हैं कि भगवद्नाम चिन्मयतत्त्व है। श्रुति व स्मृति शास्त्रों के द्वारा प्रदर्शित हरिनाम की महिमा को पाषण्डी लोग अर्थवाद कहते हैं। उनका कहना है कि ये महिमा तो बढ़ा-चढ़ा कर लिखी गयी है। जो अधम जीव श्रीहरिनाम में अर्थवाद करते हैं, वह पापी नरक में सड़-सड़ कर मरते हैं।

श्रीहरिनाम की जो महिमा व श्रीहरिनाम का जो फल श्रुति – शास्त्रो में वर्णित है, वह सत्य नहीं है, केवल मात्र श्रीहरिनाम में रुचि उत्पन्न कराने के लिए इतना फल कहा गया है – ऐसा जो कहते हैं, वह शास्त्रों के सही तात्पर्य को नहीं जानते हैं तथा वह अधम जीव यह भी नहीं जानते कि जीव का मंगल या अमंगल किस बात में है। वह तो अपने दिमाग से हर बात का उल्टा अर्थ ही सोचते हैं।

श्रीहरिनाम चिन्तामणि