श्रीश्रीगुरुगौरांगौ जयतः

श्रीभक्तिविनोद-आसन, कलकत्ता
१ नं० उल्टाडिंगी-जंक्शन रोड
ई० १।१०।१९१९

[ पूर्वी बंगाल में श्रीनाम-प्रचार के उद्देश्य से यात्रा का संकल्प — ऊर्जव्रत के नियम — नियमाग्रह के फलस्वरूप श्रीनाम-भजन और श्रीहरिगुरुवैष्णव सेवा में बाधा अभक्तिमार्ग है। ]

स्नेहविग्रहेषु—

आपका १२ आश्विन तारीख का पत्र प्राप्त हुआ। श्रीभक्तिविनोद-जन्मोत्सव पर आपकी भेजी हुई सहायता पहले ही प्राप्त हो चुकी है। मैं एक पक्ष (पंद्रह दिन) तक श्रीमायापुर में रहकर, कृष्णनगर होते हुए विगत शुक्रवार को श्रीआसन लौट आया हूँ। हाल ही में विजयादशमी के दिन मुझे पूर्वी बंगाल में श्रीनाम-प्रचार के उद्देश्य से यात्रा करनी होगी। ऊर्जव्रत का नियम यह है कि आमिष-भक्षण अर्थात् उड़द की दाल, ताम्बूल (पान), बरबटी, सेम, बासी खाद्य निषिद्ध हैं। श्रीनाम-ग्रहण और भक्ति की जिन-जिन क्रियाओं का पालन करने का संकल्प हो, उनके नियम-पालन में कोई त्रुटि या व्यतिक्रम न हो। सामान्य नियम यह है—हविष्य जैसे पवित्र द्रव्यों को श्रीभगवान् को अर्पित करके ही ग्रहण करना; अधिक निद्रा, आलस्य तथा अवैष्णवोचित आचरणों का परित्याग करना और क्षौरकर्म (बाल-दाढ़ी बनवाना) आदि का त्याग, नित्य स्नान आदि संयमित धर्म का सर्वांगीण पालन करना। विरोधी सम्प्रदाय इस समय कुछ शांत हैं, अपने-अपने विषयों में ही व्यस्त हैं। श्रीमद्भक्तिविलास ठाकुर पहले की अपेक्षा स्वस्थ हैं, ऐसा देखकर आया हूँ। एक प्राचीन भक्त उनके निकट हैं। यहाँ सब कुशल है।

नित्याशीर्वादक
श्रीसिद्धान्तसरस्वती