Bhakti Quiz 27- Aug, 2025SrilaGurudevaअपने आध्यात्मिक ज्ञान का परीक्षण करेंयहाँ पर आप सभी को आज 12 प्रश्न दिए जायेंगे । Please Write Your Name. 1 / 12 श्रीकृष्ण के अनुसार अर्जुन “अशोच्यान्” के लिए शोक कर रहे हैं। यहाँ “अशोच्यान्” शब्द का वास्तविक आशय क्या है? शरीर और आत्मा दोनों नश्वर स्थूल देह, जो कभी शोक के योग्य नहीं है आत्मा, जो अमर है केवल पितामह भीष्म 2 / 12 “गतासूनगतासुंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः”—इस कथन का मर्म क्या है? प्राणहीन और प्राणवान दोनों के लिए पण्डित शोक नहीं करते केवल मृतकों के लिए पण्डित शोक नहीं करते जीवितों के लिए शोक उचित है शोक करना सदैव मूर्खता है 3 / 12 श्रीकृष्ण अर्जुन के *प्रज्ञावाद* को क्यों अप्रज्ञा का चिन्ह बताते हैं? क्योंकि अर्जुन तर्कशास्त्र में अशिक्षित थे क्योंकि अर्जुन बाहरी विवेक दिखाकर आत्मतत्त्व को भूल रहे थे क्योंकि अर्जुन भावुक थे क्योंकि अर्जुन भीष्म से भयभीत थे 4 / 12 स्थूल शरीर को शोक-अयोग्य क्यों कहा गया है? क्योंकि वह पंचमहाभूतों से बना नश्वर है क्योंकि वह आत्मा का वास्तविक स्वरूप है क्योंकि वह कभी नहीं नष्ट होता क्योंकि उसमें सूक्ष्म देह छिपी है 5 / 12 सूक्ष्म शरीर को पण्डित क्यों शोक योग्य नहीं मानते? क्योंकि वह शाश्वत और अजर है क्योंकि वह केवल ज्ञानयोग से नष्ट हो जाता है क्योंकि वह भगवद्भक्ति से नष्ट होता है, परंतु नश्वर नहीं माना जाता क्योंकि वह स्थूल शरीर से भी कमजोर है 6 / 12 “प्रज्ञावान्” और “अप्रज्ञ” में मुख्य भेद क्या है? प्रज्ञावान् केवल धर्मशास्त्र जानते हैं प्रज्ञावान् आत्मा को नित्य और शरीर को नश्वर जानते हैं प्रज्ञावान् युद्ध में निर्भीक होते हैं प्रज्ञावान् शोक नहीं, केवल हर्ष करते हैं 7 / 12 श्रीमद्भागवतम् (१०/१/३८) के अनुसार मृत्यु की अवश्यभाविता किस प्रकार आत्मतत्त्व से संबंधित है? मृत्यु ही आत्मा का अंत है जन्म और मृत्यु केवल शरीर के गुण हैं, आत्मा के नहीं मृत्यु आत्मा को नष्ट करती है मृत्यु पाप का परिणाम है 8 / 12 गीता (२/२७) “जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु:” से क्या सिद्ध होता है? आत्मा भी जन्म लेता है मृत्यु टाली जा सकती है आत्मा और शरीर दोनों नश्वर हैं शरीर का जन्म और मृत्यु स्वाभाविक है 9 / 12 सूक्ष्म शरीर का नाश केवल किससे सम्भव है? वेदपाठ और ध्यान से तपस्या और योग से भगवद्भक्ति और भगवत्-स्मृति से ज्ञानयोग और विवेक से 10 / 12 “प्रकाशिका वृत्ति” के अनुसार जीव का स्वाभाविक धर्म क्या है? मुक्त होकर ऐश्वर्य भोग करना भगवत्-सेवा करना संसार में धर्म-पालन करना लिंगदेह को नष्ट करना 11 / 12 बद्धजीव का त्रिताप-भोग किस कारण से होता है? पाप-कर्म के कारण भगवत्-सेवा विस्मृति के कारण शरीर के कारण केवल माया के कारण 12 / 12 पण्डित का शोक न करना किस उच्चतर दृष्टि का प्रमाण है? विवेकशक्ति आत्मा की नित्यता और शरीर की असारता का बोध युद्ध में धैर्य धर्मशास्त्र का पालन Your score isThe average score is 85% 0% Exit