Bhakti Quiz SrilaGurudevaआज हमने आपको भगवत गीता के प्रथम अध्याय के 46 श्लोकों में से प्रश्न दिए हैंअपने आध्यात्मिक ज्ञान का वर्धन करेंयहाँ पर आप सभी को आज 32 प्रश्न दिए जायेंगे । Please Write Your Name. 1 / 32 पाण्डुपुत्रों की सेना की व्यूहरचना देखकर दुर्योधन किसके पास गया? भीष्म पितामह के पास अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास राजा धृतराष्ट्र के पास कर्ण के पास 2 / 32 दुर्योधन के अनुसार पाण्डुपुत्रों की विशाल सेना को अत्यंत कौशल से किसने व्यवस्थित किया था? स्वयं अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण ने द्रुपद के बुद्धिमान पुत्र (धृष्टद्युम्न) ने सहदेव ने 3 / 32 पाण्डवों की सेना में भीम और अर्जुन के समान युद्ध करने वाले किन महारथियों के नाम दुर्योधन ने पहले लिए? युयुधान, विराट तथा द्रुपद कर्ण, शकुनि तथा जयद्रथ कृपाचार्य, अश्वत्थामा तथा विकर्ण नकुल, सहदेव तथा संजय 4 / 32 दुर्योधन ने अपनी सेना के नायकों के विषय में आचार्य द्रोण को बताना क्यों आवश्यक समझा? युद्ध को रोकने के उद्देश्य से गुरु का उपहास उड़ाने के लिए पाण्डवों से संधि करने के लिए अपनी सेना का मनोबल बढ़ाने और गुरु की सूचना के लिए 5 / 32 दुर्योधन ने कौरव सेना के किन प्रमुख योद्धाओं को 'सदैव विजयी' रहने वाला बताया? युधामन्यु और उत्तमौजा स्वयं द्रोणाचार्य, भीष्म, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण तथा भूरिश्रवा सात्यकि और धृष्टकेतु चेकितान और काशिराज 6 / 32 दुर्योधन के अनुसार कौरव सेना और पाण्डव सेना के संरक्षण में क्या अंतर था? कौरव सेना असुरक्षित थी और पाण्डव सेना पूर्ण सुरक्षित थी कौरवों की शक्ति अपरिमेय थी और भीष्म द्वारा सुरक्षित थी, जबकि पाण्डवों की शक्ति भीम द्वारा सुरक्षित होकर भी सीमित थी दोनों सेनाएं भीष्म पितामह द्वारा ही संरक्षित थीं पाण्डवों की सेना अपरिमेय थी और कौरवों की सीमित थी 7 / 32 दुर्योधन ने अपनी सेना के समस्त योद्धाओं को अपने-अपने मोर्चे पर खड़े रहकर किसकी रक्षा करने का निर्देश दिया? अपनी स्वयं की रक्षा का आचार्य द्रोण की रक्षा का भीष्म पितामह की रक्षा का अश्वत्थामा की रक्षा का 8 / 32 दुर्योधन को हर्षित करने के लिए कुरुवंश के किस वयोवृद्ध प्रतापी ने सिंह की गर्जना के समान शंख बजाया? राजा धृतराष्ट्र ने अश्वत्थामा ने पितामह भीष्म ने कृपाचार्य ने 9 / 32 भीष्म पितामह के शंख बजाने के पश्चात् कौरव पक्ष में जो कोलाहल हुआ, उसमें कौन से वाद्य यंत्र सहसा बज उठे? केवल बांसुरी और वीणा डमरू और मंजीरे शंख, नगाड़े, बिगुल, तुरही तथा सींग मृदंग और झांझ 10 / 32 कौरवों के कोलाहल के उत्तर में पाण्डव पक्ष की ओर से श्वेत घोड़ों वाले विशाल रथ पर आसीन किन दो महापुरुषों ने अपने दिव्य शंख बजाए? युधिष्ठिर और भीम ने नकुल और सहदेव ने सात्यकि और धृष्टद्युम्न ने श्री कृष्ण और अर्जुन ने 11 / 32 भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के दिव्य शंखों के नाम क्रमशः क्या थे? पौण्ड्र और अनंतविजय पाञ्चजन्य और देवदत्त सुघोष और मणिपुष्पक गांडीव और कोमोदकी 12 / 32 "पौण्ड्र" नामक भयंकर शंख बजाने वाले अतिमानवीय कार्य करने वाले योद्धा कौन थे? अतिभोजी भीमसेन धर्मराज युधिष्ठिर सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु अजेय सात्यकि 13 / 32 राजा युधिष्ठिर, नकुल और सहदेव ने क्रमशः किन शंखों का वादन किया? देवदत्त, सुघोष और पाञ्चजन्य पौण्ड्र, मणिपुष्पक और देवदत्त पाञ्चजन्य, अनंतविजय और सुघोष अनंतविजय, सुघोष और मणिपुष्पक 14 / 32 पाण्डव पक्ष के शंखों की उस महाध्वनि का धृतराष्ट्र के पुत्रों पर क्या प्रभाव पड़ा? आकाश और पृथ्वी को शब्दायमान करती हुई वह ध्वनि उनके हृदयों को विदीर्ण करने लगी उनके भीतर अत्यंत उत्साह भर गया वे सब युद्ध छोड़कर भाग गए उन्होंने तुरंत आत्मसमर्पण कर दिया 15 / 32 जब अर्जुन अपना धनुष उठाकर तीर चलाने के लिए उद्यत हुए, तब उनके रथ की ध्वजा पर किसका अंकन था? भगवान विष्णु का गरूड़ जी का हनुमान जी का सूर्य देव का 16 / 32 अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण को किस नाम से संबोधित करते हुए रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले जाने को कहा? हे जनार्दन हे अच्युत हे मधुसूदन हे लक्ष्मीपति 17 / 32 दोनों सेनाओं के मध्य रथ ले जाने के पीछे अर्जुन का मुख्य उद्देश्य क्या था? युद्धभूमि से भाग जाने का मार्ग खोजना दुर्योधन से अकेले संधि वार्ता करना भीष्म पितामह को प्रणाम करना युद्ध की अभिलाषा रखने वाले विपक्ष के योद्धाओं और शस्त्रों की परीक्षा लेने वालों को देखना 18 / 32 अर्जुन के अनुसार कुरुक्षेत्र में कौन लोग दुर्योधन को प्रसन्न करने की इच्छा से लड़ने आए थे? केवल धार्मिक लोग धृतराष्ट्र के दुर्बुद्धि पुत्र की इच्छा पूरी करने वाले राजा और योद्धा जो पाण्डवों के परम मित्र थे जो शांति की स्थापना चाहते थे 19 / 32 अर्जुन द्वारा संबोधित किए जाने पर भगवान श्री कृष्ण ने उत्तम रथ को कहाँ लाकर खड़ा किया? केवल कौरव सेना के पीछे हस्तिनापुर के राजमहल के सम्मुख भीष्म, द्रोण तथा विश्व भर के समस्त राजाओं के सामने, दोनों दलों के बीच में पाण्डव सेना के शिविर में 20 / 32 दोनों सेनाओं के मध्य रथ खड़ा करके भगवान कृष्ण ने अर्जुन से क्या कहा? हे पार्थ ! यहाँ से तुरंत भाग जाओ हे पार्थ ! यहाँ पर एकत्र सारे कुरुओं (कौरवों/कुटुम्बियों) को देखो हे पार्थ ! तुम युद्ध जीत चुके हो हे पार्थ ! भीष्म पितामह पर तीर चलाओ 21 / 32 सेनाओं के मध्य अपने चाचा, ताऊ, पितामह, गुरु, भाई, पुत्र और मित्रों को देखकर अर्जुन की मानसिक स्थिति क्या हुई? वह अत्यधिक क्रोध से भर गया वह करुणा से अभिभूत हो गया और शोक करने लगा उसे अत्यधिक प्रसन्नता हुई वह अट्टहास करने लगा 22 / 32 स्वजनों को युद्ध के लिए सम्मुख उपस्थित देखकर अर्जुन के शरीर में क्या भौतिक परिवर्तन हुए? उसके भीतर अपार शक्ति का संचार हुआ उसके अंग काँपने लगे, मुँह सूख गया, रोंगटे खड़े हो गए और त्वचा जलने लगी उसका मुख क्रोध से लाल हो गया वह अचेत होकर रथ से नीचे गिर पड़ा 23 / 32 व्याकुलता की स्थिति में अर्जुन के हाथ से कौन सा प्रसिद्ध धनुष सरक रहा था? पिनाक कोदंड शारंग गाण्डीव 24 / 32 मोह से ग्रस्त अर्जुन को कुरुक्षेत्र की भूमि पर केवल क्या दिखाई दे रहा था? अपनी भावी विजय और यश केवल अमंगल के कारण स्वर्ग का सुख हस्तिनापुर का वैभव 25 / 32 अर्जुन ने अपने ही स्वजनों का वध करने के विषय में श्री कृष्ण से क्या कहा? इससे संसार का कल्याण होगा स्वजनों के वध से न तो कोई अच्छाई दिखती है और न ही राज्य या सुख की इच्छा है यह एक क्षत्रिय का परम धर्म है इससे पाण्डवों की कीर्ति बढ़ेगी 26 / 32 अर्जुन के अनुसार यदि वे धृतराष्ट्र के पुत्रों जैसे आततायियों का वध करते हैं, तो उन पर क्या परिणाम होगा? उन्हें परम मोक्ष मिलेगा उन पर पाप चढ़ेगा वे संसार के राजा बन जाएंगे उन्हें अश्वमेध यज्ञ का फल मिलेगा 27 / 32 श्री कृष्ण को 'जनार्दन' संबोधित करते हुए अर्जुन ने परिवार के विनाश में क्या देखा? एक घोर अपराध और पापकर्म एक महान उत्सव साम्राज्य विस्तार का अवसर पूर्वजों की आज्ञा का पालन 28 / 32 अर्जुन के अनुसार कुल का नाश होने पर समाज में सबसे पहले किस चीज का लोप हो जाता है? केवल धन-दौलत का अस्त्र-शस्त्रों का राजा के भय का सनातन कुल-परम्परा (कुल-धर्म) का 29 / 32 जब कुल में अधर्म प्रमुख हो जाता है, तो उसका स्त्रियों पर और समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है? स्त्रियाँ स्वतंत्र हो जाती हैं समाज का कल्याण होता है धार्मिक यज्ञ बढ़ जाते हैं कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं और उससे अवांछित सन्तानें (वर्णसंकर) उत्पन्न होती हैं 30 / 32 अवांछित सन्तानों की वृद्धि होने से पितरों (पूर्वजों) का पतन क्यों हो जाता है? क्योंकि वे पाण्डवों से रूठ जाते हैं क्योंकि वे स्वर्ग छोड़कर युद्ध देखने आते हैं क्योंकि उन्हें जल तथा पिण्ड दान देने की क्रियाएँ समाप्त हो जाती हैं क्योंकि वे राजा दुर्योधन के पक्ष में होते हैं 31 / 32 अर्जुन ने गुरु-परम्परा से सुनी हुई कौन सी बात श्री कृष्ण के समक्ष दोहराई? जो युद्ध जीतता है वह स्वर्ग जाता है जो लोग कुल-धर्म का विनाश करते हैं, वे सदैव नरक में वास करते हैं क्षत्रिय को सदा युद्ध करना चाहिए धृतराष्ट्र ही हस्तिनापुर के असली राजा रहेंगे 32 / 32 इस मानसिक संताप के अंत में अर्जुन ने क्या निर्णय लिया और संजय ने धृतराष्ट्र को अंत में क्या बताया? अर्जुन ने तीव्रता से बाण चलाया अर्जुन रथ से उतरकर कौरव सेना में शामिल हो गया अर्जुन ने अपना धनुष-बाण एक ओर रख दिया और शोकसंतप्त चित्त से रथ के आसन पर बैठ गया अर्जुन ने श्री कृष्ण से रथ को वापस ले चलने को कहा Your score isThe average score is 84% 0% Exit