Bhakti Quiz 05- Feb, 2026SrilaGurudevaअपने आध्यात्मिक ज्ञान का परीक्षण करेंयहाँ पर आप सभी को आज 10 प्रश्न दिए जायेंगे । Please Write Your Name. 1 / 10 श्लोक 2.51 के अनुसार 'मनीषी' (बुद्धियोगी) कर्मफल का त्याग कर किस पद को प्राप्त करते हैं? स्वर्ग लोक को। अनामय (रोग और दुःख रहित) पद को। इन्द्र पद को। पुनर्जन्म को। 2 / 10 बुद्धि के किस अवस्था को पार करने पर 'निर्वेद' (वैराग्य) प्राप्त होता है? मोहरूप सघन वन (मोहकलिलं) को। अहंकार को। शास्त्रों के ज्ञान को। धन की इच्छा को। 3 / 10 'निर्वेद' का वास्तविक अर्थ 'सा. व. प्रकाशिका वृत्ति' में क्या बताया गया है? सब कुछ छोड़कर वन चले जाना। वेदों का पाठ करना। संसार से अनासक्त होना। चुप रहना। 4 / 10 संसार में जीव की आसक्ति का मूल कारण क्या है? भाग्य। परिवार। निर्धनता। देह में आत्मबुद्धि (स्वयं को शरीर मानना)। 5 / 10 निर्वेद प्राप्त होने के बाद साधक किन कार्यों में प्रवृत्त होता है? ऐकान्तिक भजन में। यज्ञ अनुष्ठानों में। व्यापार में। दान-पुण्य में। 6 / 10 मुण्डक उपनिषद् (1.2.12) के अनुसार तत्त्ववेत्ता ब्राह्मण कर्मों द्वारा प्राप्त सुखों को कैसा जानते हैं? शाश्वत और दिव्य। महान और श्रेष्ठ। अनित्य और दुःखप्रद। केवल सुखद। 7 / 10 प्रह्लाद महाराज (श्रीमद्भा. 7.9.49) के अनुसार सुधियो (विवेकी पुरुष) वस्तुओं को कैसा जानकर भजन में लगते हैं? अनन्त। बहुत कीमती। स्वयं की संपत्ति। आदि-अन्तविशिष्ट (नाशवान)। 8 / 10 श्लोक 2.53 के अनुसार बुद्धि कब 'निश्चल' कहलाती है? जब वह शास्त्रों के वाद-विवाद में रहे। जब वह नाना प्रकार के लौकिक और वैदिक अर्थों को सुनने से विरक्त होकर भगवान में स्थिर हो जाए। जब वह व्यापार में स्थिर हो। जब वह नींद में हो। 9 / 10 समाधि का लक्षण इस प्रसंग में क्या बताया गया है? अचला अर्थात् स्थैर्यवती बुद्धि। गहरी नींद। एकाग्रता की कमी। संसार का विचार। 10 / 10 बुद्धियोग का अभ्यास करने का अंतिम परिणाम क्या बताया गया है? अधिक धन लाभ। शास्त्रों पर विजय। अपरोक्षानुभव (साक्षात्कार) द्वारा जीवन से मुक्ति। केवल प्रसिद्धि। Your score isThe average score is 90% 0% Exit