भजन के आरम्भ में साधक के हृदय में जागतिक वस्तुओं के प्रति तृष्णा व भगवद् विषयक क्रियाओं के प्रति आसक्ति का युद्ध निरन्तर चलता रहता है। सिद्धावस्था किसी को भी सहसा ही प्राप्त नहीं होती। यह निष्कपट साधन भजन की तीव्रता पर निर्भर करता है।

श्रील भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज